जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आरक्षित 24 सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर भारत के कानूनी और नैतिक हक का सबसे बड़ा प्रमाण हैं। 1947 में महाराजा हरि सिंह द्वारा भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद से ही पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
इतिहास और कानूनी स्थिति
साल 1947 में पाकिस्तानी आक्रमण के बाद से ये सीटें खाली रखी गई हैं। 2022 के परिसीमन में भी इन सीटों को यथावत रखकर भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि PoK की वापसी उसकी प्राथमिकता है और इस पर उसका दावा कभी कम नहीं हुआ है।
140 करोड़ भारतीयों का संकल्प
1994 के संसदीय प्रस्ताव के तहत भारत PoK को अपना हिस्सा मानता है। वर्तमान में वहां बढ़ते विरोध और इन खाली सीटों का अस्तित्व 140 करोड़ भारतीयों के उस दृढ़ संकल्प को दर्शाता है कि PoK भारत का था, है और हमेशा रहेगा।