छत्तीसगढ़ के बस्तर की पहचान केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध आदिवासी संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वीर नायिकाओं की गौरवगाथाओं का केंद्र भी रहा है। इन्हीं में से एक हैं वीरांगना चमेली बाबी, जिन्होंने अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए शत्रुओं के सामने झुकने के बजाय अपने प्राणों का बलिदान देना बेहतर समझा। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी आज भी बस्तर के जनमानस में रची-बसी है।
स्वाभिमान के लिए दी कुर्बानी
चमेली बाबी ने एक शत्रु राजा के विवाह प्रस्ताव को ठुकराकर साहस की मिसाल पेश की थी। उन्होंने अपनी अस्मिता और मातृभूमि के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया, जो उन्हें बस्तर के इतिहास में एक अमर स्थान दिलाता है।
स्मृति में स्थापित प्रतिमा
उनकी वीरता को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से सरकार ने हाल ही में उनकी प्रतिमा स्थापित की है। यह पहल न केवल उनके बलिदान को सम्मान देती है, बल्कि बस्तर के गौरवशाली इतिहास को भी जीवंत बनाए रखती है।