छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के झलमला गांव के किसान अशोक कुमार पटेल ने खेती के पारंपरिक तरीकों को बदलकर नई मिसाल कायम की है। वे धान की फसल के लंबे इंतजार के बजाय कम समय में तैयार होने वाली सब्जियों पर जोर दे रहे हैं, जिससे उन्हें हर दिन अच्छी आमदनी हो रही है।
कम समय में अधिक मुनाफा
अशोक कुमार के अनुसार, धान की फसल पकने में चार महीने का लंबा समय लगता है, जबकि लालभाजी और पालक जैसी सब्जियां महज 20 से 25 दिनों में तैयार होकर बाजार में बिकने लगती हैं। वर्तमान में उनके खेत की बरबटी 20 रुपये और तोरई 80 रुपये प्रति किलो तक के भाव पर बिक रही है।
आधुनिक तकनीक का लाभ
खेती को अधिक उत्पादक बनाने के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाया है। इस तकनीक के उपयोग से न केवल पानी की बड़ी बचत होती है, बल्कि खाद का सही इस्तेमाल होने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार हुआ है।