पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य और उनके उपचार को लेकर जारी विवाद ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर उन्हें अस्पताल के बजाय जेल भेजने के फैसले ने सरकार को चौतरफा घेरे में ला खड़ा किया है।
सहयोगी दलों और विपक्ष का दबाव
सरकार की मुख्य सहयोगी पार्टी पीपीपी ने कानून निर्माण में समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी है। वहीं, इमरान खान के मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे शहबाज प्रशासन की स्थिति कमजोर होती दिख रही है।
कानूनी और राजनीतिक खींचतान
अदालत के आदेशों के पालन में बरती गई लापरवाही को लेकर सरकार की किरकिरी हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जारी रहा, तो सत्ताधारी गठबंधन का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।