शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के हालिया शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के खिलाफ एकजुट होने का कड़ा संकल्प लिया है। इस घोषणा पत्र पर चीन के हस्ताक्षर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण पेश किए हैं, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
चीन का बदला स्टैंड
चीन द्वारा आतंकवाद के खिलाफ भारत के सुर में सुर मिलाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। चूंकि पाकिस्तान को अक्सर इन तीनों समस्याओं का केंद्र माना जाता है, ऐसे में वैश्विक मंच पर चीन का यह रुख उसे पूरी तरह अकेला कर सकता है।
पाकिस्तान की बढ़ती चुनौतियां
आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं पर दस्तखत करने के बाद पाकिस्तान के लिए अपनी पुरानी नीतियों को जारी रखना कठिन होगा। अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान अपनी धरती से पनपने वाले अलगाववाद और चरमपंथ पर लगाम लगा पाएगा या वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय में और अलग-थलग पड़ जाएगा।