रूस और ईरान के बीच एक गुप्त सैन्य प्रोजेक्ट ‘C430L’ पर काम चल रहा है, जिसे पुतिन की ओर से ईरान को दी गई अब तक की सबसे बड़ी मदद माना जा रहा है। इस मिशन के जरिए ईरान ऐसी सुपरसोनिक मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
समुद्री रडार को चकमा देने में सक्षम
ये मिसाइलें समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरने में सक्षम हैं, जिससे ये अमेरिकी रडार की पकड़ में नहीं आतीं। इस तकनीक की मदद से ईरान मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों को पलक झपकते ही निशाना बनाने की क्षमता हासिल कर लेगा।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा असर
इस नए ‘ब्रह्मास्त्र’ के सामने आने से खाड़ी देशों में सैन्य संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह कदम अमेरिकी प्रभाव को कम करने और ईरान की सैन्य ताकत को मजबूती देने की एक बड़ी रणनीति है।