मध्य प्रदेश में बिजली वितरण सुधार के लिए शुरू की गई RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पांच जिलों में इस योजना के तहत ₹1710 करोड़ खर्च होने के बावजूद बड़े पैमाने पर तकनीकी खामियां और अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
योजना में गंभीर अनियमितताएं
जांच में पता चला है कि इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लगाए गए बिजली के खंभे टेढ़े-मेढ़े हैं, अर्थिंग का काम अधूरा है और सुरक्षा उपकरणों की भी कमी है। चौंकाने वाली बात यह है कि कागजों में यह सारा काम पूरा दिखाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
करोड़ों के खर्च पर सवाल
₹1710 करोड़ के भारी-भरकम बजट के बावजूद ऐसी गंभीर खामियों का मिलना योजना में बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। इन अनियमितताओं के कारण न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।