श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज विश्व संस्कृत दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा, दर्शन और वैज्ञानिक चिंतन की संवाहक संस्कृत भाषा के सम्मान और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस विशेष दिन पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए संस्कृत को हमारी सांस्कृतिक जड़ों का आधार बताया है।
ज्ञान और विज्ञान की समृद्ध विरासत
संस्कृत केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों का आधार रही है। पाणिनि के व्याकरण से लेकर कालिदास के कालजयी साहित्य तक, इस भाषा ने भारतीय बौद्धिक परंपरा को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है।
आधुनिक युग में भाषा का महत्व
आज भी संस्कृत भाषा वैश्विक स्तर पर शोध और अध्ययन का केंद्र बनी हुई है। यह न केवल आधुनिक भारतीय भाषाओं की जननी है, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत को संजोने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।