अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ संवाद स्थापित कर खुद को एक सफल वार्ताकार साबित करने की कोशिश में हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि 2019 के बाद से उत्तर कोरिया की स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और किम अब ट्रंप के किसी भी लुभावने प्रस्ताव में फंसने वाले नहीं हैं।
परमाणु शक्ति और रूस से नई मजबूती
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु क्षमता और लंबी दूरी की मिसाइलों को काफी विकसित किया है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के साथ बढ़ी नजदीकियों ने किम जोंग उन को आधुनिक सैन्य तकनीक और युद्ध का नया अनुभव प्रदान किया है, जिससे वे पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास से भरे हैं।
बदल चुकी है किम की कूटनीतिक प्राथमिकताएं
आज का उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को एक परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित कर चुका है। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, किम जोंग उन अब अमेरिका के साथ किसी भी ऐसी डील में दिलचस्पी नहीं रखते जो उनकी संप्रभुता या सैन्य शक्ति को कमजोर करती हो, जिससे ट्रंप की पुरानी कूटनीति के सफल होने की संभावना बेहद कम है।