15 अगस्त का दिन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि जापान के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज है। इसी दिन साल 1945 में जापान ने दूसरे विश्वयुद्ध में आत्मसमर्पण किया था, जिससे वैश्विक युद्ध का अंत हुआ था।
यासुकुनी श्राइन का विवादित इतिहास
टोक्यो स्थित यासुकुनी श्राइन एक ऐतिहासिक शिंतो मंदिर है, जहां युद्ध में मारे गए 24 लाख से अधिक लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस मंदिर में द्वितीय विश्वयुद्ध के 14 युद्ध-अपराधियों के नाम भी शामिल हैं, जिसके कारण हर साल 15 अगस्त को यहां होने वाले आयोजनों पर चीन और दक्षिण कोरिया जैसे पड़ोसी देश कड़ी आपत्ति जताते हैं।
श्रद्धा और तनाव का केंद्र
जापान के लिए यह स्थल अपने पूर्वजों और सैनिकों के सम्मान का प्रतीक है, लेकिन इसमें युद्ध-अपराधियों के नाम होने के कारण यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक तनाव का कारण भी बन जाता है। हर साल इस तारीख को मंदिर में होने वाले कार्यक्रमों पर दुनिया की नज़रें टिकी रहती हैं।