रायपुर में आयोजित एक कार्यशाला में साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिस अधिकारियों को वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व समझाया। यदि ठगी के तुरंत बाद सही कदम उठाए जाएं, तो पीड़ित के पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
गोल्डन ऑवर का महत्व
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, धोखाधड़ी होने के पहले एक घंटे के भीतर की गई कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस समय सीमा में शिकायत दर्ज कराने से ठगी की गई राशि को बैंक खातों में फ्रीज करना आसान हो जाता है।
5-स्टेप फॉर्मूला
धोखाधड़ी के तुरंत बाद पुलिस को सूचित करें, ताकि वे ट्रेस, फ्रीज, प्रिजर्व और इन्वेस्टिगेट की प्रक्रिया शुरू कर सकें। त्वरित रिपोर्टिंग और सही तकनीकी प्रक्रिया का पालन करने से गायब हुए पैसों की रिकवरी संभव हो सकती है।