छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के संवाहक: रामचंद्र यादव ने सहेज रखी है बिरहा की विरासत

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By Partho Banarjee Published On: September 9, 2026

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में लोक कला की खुशबू आज भी बरकरार है, जिसका श्रेय 60 वर्षीय रामचंद्र यादव को जाता है। उन्होंने अपने दादा से विरासत में मिले बिरहा और कजरी जैसे पारंपरिक गीतों को आज भी अपने कंठ में जीवंत रखा है।

बिना किताबों के सीखी कला

रामचंद्र यादव ने महज 15 साल की उम्र में बुजुर्गों को सुनकर ये गीत सीखे थे। बिना किसी लिखित दस्तावेज के, उन्होंने अपनी याददाश्त के दम पर इन लोक गीतों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है।

परंपरा के सच्चे प्रहरी

आज के आधुनिक दौर में भी रामचंद्र यादव पूरी निष्ठा के साथ अपनी संस्कृति को सहेज रहे हैं। उनकी गायकी न केवल पुरानी यादों को ताजा करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए लोक परंपरा का एक अनमोल उदाहरण भी है।