उत्तरी इराक के कई गांव आज पूरी तरह से वीरान हो चुके हैं, जहां कभी चहल-पहल हुआ करती थी। दस साल पहले इस्लामिक स्टेट के कब्जे के बाद मची तबाही के निशान आज भी वहां की खामोश गलियों में साफ देखे जा सकते हैं।
खंडहरों में कैद खौफनाक यादें
इन गांवों में न तो अब बच्चों की हंसी सुनाई देती है और न ही बाजारों की रौनक बाकी है। यहां की हर एक दीवार उस दौर के अत्याचारों और नरसंहार की मूक गवाह बनी हुई है, जिसने स्थानीय लोगों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया।
बर्बादी के बीच थमी जिंदगी
आईएसआईएस के हमले के बाद से ही ये इलाके पूरी तरह से सुनसान पड़े हैं। दूर-दूर तक फैले सन्नाटे के बीच लोग आज भी उस खौफनाक दौर को याद कर सिहर उठते हैं, जिसने इन बस्तियों को भूतिया गांवों में तब्दील कर दिया है।