बीजेपी को सुरखी और सांची सीट पर नजर आ रहा कठिन मुकाबला, जानिए क्यों

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मध्यप्रदेश। मप्र में उपचुनाव का संग्राम उम्मीदवारों के लिये ही कठिन दौर का संकेत दे रहा है। कई हाइप्रोफाइल उम्मीदवार कडे मुकाबले में फंस गये हैं। अनूपपुर में अपने बयानों के बाद के हालात से जूझ रहे बिसाहूलाल सिंह का एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह बंदूक लहराते हुए अपने नौकर को धमकाते हुए नजर आ रहे हैं। उनकी टिप्पणियों का वीडियो तो पहले ही विवाद में है। वहीं सागर जिले की सुरखी सीट पर जीत के लिये ताकत लगा रहे भाजपा (BJP) उम्मीदवार गोविंद सिंह राजपूत (Govind) के आंसू मंच पर ही छलक आये। जबकि काबीना मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक ने मंच से कह दिया कि ‘भाजपा के मंत्रियों के घर पैसा बरसता है।

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मंत्री के घर में पैसा बरसता है 

सुरखी विधानसभा सीट से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पीडल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव कह रहे हैं कि मंत्रियों के घर में पैसा बरसता है। कोई पैसे के लालच में यों बिकेगा। ‘भइया मंत्री के घर में पैसा बरसत है। समझे, पत्रकार बैठे हैं, कह रहे हैं सही कह रहे हैं। इस पर कांग्रेस प्रवता भूपेन्द्र गुप्ता ने चुनाव आयोग में शिकायत की बात कही है। उन्होंने कहा यह बीजेपी (BJP)  शासन में भ्रष्टाचार का नमूना है, यदि मंत्रियों के यहां यह हाल है तो सीएम के यहां या होता होगा।

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बीजेपी को सुरखी, सांची सीट पर मुकाबला कठिन नजर आ रहा है

खाद्य मंत्री बिसाहूलाल का जो वीडियो सामने आया है उसके बारे में कहा जा रहा है कि इसे दो साल पहले चुनाव में बीजेपी (BJP) ने भी शेयर किया था। उधर बीजेपी (BJP) को सुरखी, सांची सीट पर मुकाबला कठिन होता नजर आ रहा है। सुरखी के जैसीनगर में बीजेपी उम्मीदवार गोविद सिंह राजपूत के आंसू छलक आने से कई तरह की चर्चाए हो रही हैं। मंच पर भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि अब उन्हें अहसास हो रहा है कि वे पंद्रह बीस साल पहले ही बीजेपी (BJP)  मे आ जाते तो बेहतर होता। माना जा रहा है कि कांग्रेस उम्मीदवार व पुरानी भाजपा विधायक पारुल साहू से मिल रही चुनौती के चलते राजपूत ने इमोशनल कार्ड भी खेला है। उनके पक्ष में ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सभा कर चुके हैं।

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कांग्रेस के बड़े नेता हुए खामोश 

मप्र कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति में ‘आईटम’ ने कई नये गुल खिला दिये हैं। कांग्रेस हाइकमान किसी भी तरह का ‘रिस्क’ लेने के लिये तैयार नहीं है, क्योकि उसे आशंका है कि इससे दूर रहने में ही बिहार व अन्य चुनावी जगहों पर खैर है। इस विवाद के बाद राहुल गांधी या प्रियंका गांधी का मप्र में दौरा या रोड शो भी खटाई में पड गया है। पूरे प्रकरण में ‘गौरतलब’ यह है कि राहुल गांधी का बयान सामने आने के बाद कांग्रेस के बडे नेता इस मामले पर खामोश हो गये हैं, यहां तक कि प्रभारी महासचिव मुकुल वासनिक भी ‘तटस्थ’ हैं।

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कमलनाथ को हाइकमान ने दे रखा था फ्री-हैंड  

जानकार सूत्रों का कहना है कि मप्र में कांग्रेस के संबंध में सभी निर्णय लेने के लिये हाइकमान ने कमलनाथ को उनके अनुभव व संसाधनों को देखते हुए फ्री-हेंड दे रखा था, लेकिन आइटम मामले के तूल पकडने से पहले ही इसे ‘खत्म’ करने के प्रयास नहीं होने से हाइकमान नाखुश है। अब इस पूरे मामले को एआईसीसी में अस्तित्व में आई नयी टीम रिव्यू करना चाहती है। पार्टी से जुडी कुछ महिला नेताओं ने भी आईटम वाली टिप्पणी को अनुचित करार दिया है। कांग्रेस के सचिव स्तर के कुछ नेता और टीम राहुल के कुछ लोग मप्र में चुनाव संबंधी फीडबैक देने के लिये मप्र भेजे गये हैं।

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इमरती देवी को ‘पीड़ित दलित नेता’ के तौर पर किया पेश 

प्रभारी महासचिव मुकुल वासनिक से भी इस बारे में कांग्रेस हाइकमान के तीनों ‘चेहरों’ ने बात की है। एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इमरती देवी को ‘पीड़ित दलित नेता’ के तौर पर बीजेपी (BJP) द्वारा पेश करने व मायावती के भी सामने आ जाने के बाद वासनिक का चुप रहना अजब है, क्योंकि वे खुद दलित नेता है। बताया जाता है कि राहुल ने वासनिक से फीडबैक के बाद केरल में वह बयान दिया था, जबकि नाथ को उम्मीद थी, कि यदि हाइकमान इस बारे में कुछ बोलना चाहता है तो कम से कम उनसे पहले बात की जाती।

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राहुल, प्रियंका का संभावित रोड शो खटाई में  

ज्ञात हो कि नाथ ने राहुल के बयान पर कहा भी था कि ‘उन्हें(राहुल) को जैसे समझाया गया वैसा बोल दिया, जबकि वे खेद जता चुके थे। इस मामले के बाद प्रियंका गांधी का संभावित रोड शो भी खटाई में है। हालांकि एक सूत्र का कहना है कि राहुल या प्रियंका का कोई कार्यक्रम पहले भी नहीं बनाया गया था लेकिन स्टार प्रचारकों की सूची में उनका नाम इसीलिये रखा गया था कि उनके एक संक्षिप्त दौरे की गुंजाइश बनाई जा सके। हाइकमान को लगता है कि प्रियंका व राहुल गांधी ने उप्र के हाथरस कांड को लेकर जो स्टेंड लिया है वह मप्र में आने पर बिखर सकता है। वहीं प्रवता भूपेन्द्र गुप्ता का कहना है कि राहुलजी की भावना के मुताबिक ही कमलनाथ ने खेद जताया था, वह मामला अब समाप्त है।

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बिसाहूलाल का करीब 8 साल पुराना वीडियो था 

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अनूपपुर में बीजेपी (BJP)  प्रत्याशी बिसाहुलाल सिंह के वायरल वीडियो पर आज कहा कि यह करीब आठ साल पुराना वीडियो है और कांग्रेस की फेक वीडियो जारी करने की स्टाइल का नमूना है। बिसाहू पर कभी एक भी प्रकरण दर्ज नही हुआ है। मिश्रा ने निर्वाचन आयोग के पूर्व सीएम कमलनाथ को जारी किए नोटिस पर कहा कि अब यह तय हो गया कि कमलनाथ ने गलत बोला था,यह बात चुनाव आयोग,महिला आयोग, राहुल गांधी तक बता चुके हैं।

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